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जरूरत

कहना तो बहुत है तुमसे
पर तुम समझ नहीं पाओगे
तुम हार जीत करने वाले
इंसान कहां बन पाओगे
तुम रहते हो महलों में सब
महसूस कहा कर पाओगे
जो सोता हो अंबर के नीचे
उसको कैसे समझाओगे
तुम कहते हो ये ठीक है
हम कहते है ये ठीक नहीं
अब हमको हमारी जरूरत भी
क्या तुम आकर समझाओगे

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