Local kalakar

माँ

कभी जब अक्सर मैं रात को जगता हूं

आधी अधूरी नींद में तुझे याद करता हूं

तुझे मैं ये बात बताना चाहता हूं

घर की याद आती है मुझे भी ये कहना चाहता हूं

यहां सब कुछ मतलबी है नहीं लगता मन मेरा

सब छोड़ के मैं भी घर आना चाहता हूं

कितनी दफा में तुझसे सच छुपाता हूं

हिम्मत ना हो फिर भी हंस जाता हूं

क्या है दिल में मेरे तुझे मालूम ना हो जाए

इस लिए मैं अक्सर घर कम आता हूं

तेरे होते हुए भी मैं अकेला रह जाता हूं

कितनी बातें दिल में है बताना चाहता हूं

हज़ार बार सोचता हूं तकलीफ देने से पहले

तुझे मैं बस खुश देखना चाहता हूं

Next Post

Previous Post

Leave a Reply

© 2024 Local kalakar

Theme by K Techno