Local kalakar

हार

मेरी हर हार पर वो खुश है

उसे लगता हैं मैं काबिल नहीं

उसकी हर शिकायत सुनता हूं

उसे लगता है  मैं हाज़िर नहीं

वो खुद ही है बस खुद ही है

उसे लगता हैं मैं अब कुछ नहीं

मैं क्या हूं मेरा खुदा जाने बस उसके आगे फिर कुछ नहीं

Next Post

Previous Post

Leave a Reply

© 2024 Local kalakar

Theme by K Techno